do baazo ki kahani – inspirational story hindi दो बाज़ो की कहानी हिंदी में

do baazo ki kahani – inspirational story hindi दो बाज़ो की कहानी हिंदी में

 

हेलो दोस्तों आज जो कहानी मैं सुनाने आप को जा रहा हूं वह दो बाजो की है अकबर के दरबार में एक बड़ा ही विद्वान आता है और वह महाराजा की शासन प्रणाली से बहुत ही खुश होकर अकबर महाराज को दो बाज के बच्चे उपहार में देता है दोनों ही बाज के बच्चे एक अच्छी नस्ल के थे इतने सुंदर बाजो को महाराजा अकबर ने पहले कभी नहीं देखा था

क्योंकि वह दोनों बाजों के बच्चे काफी छोटे थे इसलिए महाराज ने उनकी देखभाल और पालन पोषण के लिए व्यक्ति को रखा जो उन दोनों बाजो का खूब ध्यान रखता था कुछ महीने बाद जब महाराज को उन दोनों बाजो की याद आई तो उनके मन में आया क्यों हम दोनों बाजो को देखा जाए

जब महाराज उस व्यक्ति के पास गए जो उन दोनों बाजो का ध्यान रख रहा था तो महाराज ने देखा दोनों ही बाज के बच्चे अब  पूरी तरह से बड़े हो चुके थे महाराज उस व्यक्ति को जो उन बाजो का पालन पोषण कर रहा था से कहते हैं कि मैं इन दोनों बाजों की उड़ान देखना चाहता हूं

महाराज की बात सुनकर वह व्यक्ति दोनों बाजो  को उड़ाने लगता है दोनों बाजो  आकाश में उड़ रहे होते हैं तो एक बाज तो आकाश  में काफी ऊचा उड़ रहा होता है जबकि दूसरा बाज कम ऊचाई में थोड़ी देर उड़ने के बाद वापिस उसी डाल पर आ बैठता जहा से उसने उड़ान भरी थी यह देख महाराज बड़े ही आश्चर्यचकित होते हैं और समझने का प्रयत्न करते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है

वह उस व्यक्ति से भी कहते हैं यह दूसरा बाज आकाश में पहले बाज की तरह ऊचाई पर क्यों नहीं उड़ रहा तो वह व्यक्ति कहता है महाराज इसके बारे में मुझे कुछ ज्ञात नहीं है इस बात से चिंतित होकर महाराज वापस अपने महल में आ जाते हैं और अगले ही दिन एलान करते हैं कि जो भी व्यक्ति या विद्वान उस दूसरे बाज को पहले बाज की तरह आकाश में ऊचा उड़ाने में समर्थ होगा तो महाराज उसे स्वर्ण मुद्राएं इनाम में देंगे बात सुनकर राज्य में विद्यमान बड़े-से-बड़े विद्वान राजा के समक्ष आए और उस बाज को आकाश में उड़ाने के लिए प्रयत्न करने लगे परंतु कोई सफल नहीं हो सका उस दूसरे बाज़ को ऊचाई तक उड़ाने में !  वह बाज़ पहले की तरह ही थोड़ा आकाश में उड़ता और फिर वापिस उसी डाल पर आ कर बैठ जाता जहा से उसने उड़ान भरी थी

अब तो राजा भी काफी चिंतित हो गए कि राज्य के लगभग सभी विद्वानों ने प्रयत्न किया परंतु कोई भी उस बाज़ को ऊचा उड़ने में सफल नहीं हो सका तभी राजमहल में एक व्यक्ति आता है और राजा से उस बाज को उड़ाने के लिए आज्ञा मांगता है राजा उसे आज्ञा देते हैं अगले ही दिन राजा देखते हैं कि दोनों ही बाज आकाश में ऊंचाइयों तक उड़ रहे होते हैं राजा यह देखकर काफी खुश होते हैं और काफी आश्चर्यचकित भी होते हैं कि कैसे उस व्यक्ति ने उस बाज को आकाश में ऊंचाई तक उड़ने में सफलता प्राप्त कर ली अगले ही दिन राजा उस व्यक्ति को स्वर्ण मुद्राएं इनाम में देते हैं उसके बाद उस व्यक्ति से पूछते हैं कि कैसे तुमने उस बाज को आकाश में ऊंचाई तक उड़ाने में समर्थ हुए तो वह व्यक्ति कहता है महाराज मैंने तो केवल उस डाल को काट डाला जिस डाल पर वह बाज उड़कर थोड़ी देर बाद वापस आकर बैठ जाता था

दोस्तों यह कहानी खत्म होती है इस कहानी से तात्पर्य यह है कि सभी व्यक्ति अपने सामर्थ्य को कौशलता को भूलकर एक डाल रूपी जगह पर ही रहते हैं और पूरा जीवन व्यतीत कर देते हैं और ऊंचे लक्ष्य को प्राप्त करने का सोचते भी नहीं हम सभी को भी उस व्यक्ति की तरह इस डाल को काट देना चाहिए और अपने सामर्थ और कौशल को समझना चाहिए और ऊंचे लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर बढ़ना चाहिए

दोस्तों मै आशा करता हूं आपको एक कहानी अच्छी लगी होगी ! धन्यवाद

Related posts

Leave a Comment